हद से पार – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हद से पार बहुत हो गयी, अब तो कुछ करना होगा
तिल – तिल कर मरने से अच्छा, जंग हमें लड़ना होगा।

बहुत सहे हम आत्म ग्लानि, मनमानी अपराधों का
अब न देखें पीछे मुड़ के, सत्य कर्म करना होगा।

नारी है उत्थान जगत की, पतन इसका हम रोकेंगे
तंग कपड़ो की शौक लगी, उसको दूर करना होगा।

पर्दे पर अश्लील तस्वीरें , मन को घात पहुँचाता है
बंद करेंगे खेल – तमाशे, ऐसा नीव रखना होगा।

चलचित्र हो या दूरदर्शन, बाज नहीं आने वाले
गंदी – भद्दी तस्वीरों को, हमें दमन करना होगा।

लेखक अपनी संस्कृति को, ऐसे – कैसे भूल गये
दूषित समाज वो कर डाले , उसको दफ़न करना होगा।

सु विचार आये कैसे, भंग हुआ संयुक्त परिवार
उनके बच्चे विखर गये, इतना ख्याल रखना होगा।

धर्म – संस्कार, ईमान से बढ़कर, नहीं कोई दूजा
दादा – दादी, माँ – पिता जी, सद्भाव ये रखना होगा।

मोबाइल या इंटरनेट , बच्चों को कर रहा खराब
उनका भविष्य विगड़ रहा, इतना ज्ञान रखना होगा।

उल्टे – सीधे प्रचारों से, समाज को बदहाल किये
“बिन्दु” को कम मत आँको, हमसे तुम्हें डरना होगा।

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2 Comments

  1. davendra87 15/09/2019
  2. C.M. Sharma 17/09/2019

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