चंद्रयान:-विजय

कसम है मुझे चाँद तेरी चांदनी की
छूकर रहेंगे अंग तेरे जो है रेशमी सी
क्या हुआ जो आज न तुझे छू पाए है
नजर तुझपे ही अब भी हम टिकाये है

तेरा इस कदर इतराना वाजिब सही
होंगे तेरे दिल में हम भी काबिज कभी
कदम चंद बचे थे तुझे गले लगाने को
टूट गया संपर्क तुझे प्यार जताने को

मोहब्बत इस कदर करते है हम तुमसे
जो देखा करीब सब्र खो दिया था हमने
दौड़ पड़ा अपने आगोश में लेने को तुझको
पर काल ने ले लिया अपने आगोश में मुझको

इंतज़ार मिलन का थोड़ा और बढ़ा है
पर हौसलो पर कोई फर्क न पड़ा है
जल्द आऊंगा फिर लौटकर तुझसे मैं मिलने
पहना दूंगा तुझको फिर मैं तिरंगे के गहने

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6 Comments

  1. Bhawana Kumari 08/09/2019
    • vijaykr811 09/09/2019
  2. डी. के. निवातिया 09/09/2019
    • vijaykr811 09/09/2019
  3. C.M. Sharma 12/09/2019
    • vijaykr811 12/09/2019

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