गरीबी-Bhawana Kumari

फटे पुराने कपड़े जी तोड़ मेहनत,

करते पल भर आराम नहीं ।

सुबह से लेकर शाम तक,

भटकते रहते इधर-उधर ।

दो रोटी की तलाश में,

पर भोजन मिलने का नाम नहीं ।

खाली हाथ लौट आते शाम को घर,

उसके जितना कोई लाचार नहीं ।

खाली हाथ देख कर मासुम आँखें कहती,

पापा आज हमें भी भूख नहीं ।

फटे पुराने कपड़े जी तोड़ मेहनत,

करते पल भर आराम नहीं ।

भावना कुमारी

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया 09/09/2019
  2. C.M. Sharma 12/09/2019

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