सुमिरन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सुमिरन

हमर नइया के पार करदा आवा ए हरी
हमर अर्जी बा मर्जी तोहार ए हरी।

केतने के नइया तूं पार कर दिहला
भक्त के केतने उपकार कर दिहला
हमर बिगड़ी सुधार करऽ आवा ए हरि
हमर अर्जी बा मर्जी तोहार ए हरी।।

टुटल पतवार बाटे नाव बा पुरानी
डगमग डोले नइया करे हैरानी।
पड़ल बानी मझधार में हम आवा ए हरि
हमर अर्जी बा मर्जी तोहार ए हरी।।

बालक अबोध बानी जानी न कविताई
भक्त तहार बानी कइसे ई बताईं ।
तनी हमरो पर बिचार करऽ आवा ए हरि
हमर अर्जी बा मर्जी तोहार ए हरी ।।

कउनो न सहारा लुउके कउनो ना उपाई
भटकल बहुत बानी हम कइसे समझाईं।।
हमर सपना साकार करऽ आवा ए हरि
हमर अर्जी बा मर्जी तोहार ए हरी ।।

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