सिसकियाँ

सिसकियाँ होंठों से दबाते दबातेरो दिये वो मुस्कराते – मुस्करातेसोचा समेट लूँगा फिर से बाहों मेंगुजर गया वक्त जख्म दिखाते दिखातेकैसे काटी उसके बिना ये ज़िन्दगीभर आई आँखें सब बताते बतातेजाने किस रिश्ते से है उम्मीद उनकोखाक हो गये हम रस्में निभाते निभातेराकेश कुमार

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/08/2019
  2. rakesh kumar rakesh kumar 20/05/2020

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