राधा की प्रीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

छनन छनन बाजे, राधा की पैजनिया
मन मेरा मोहे , तेरा ये सुरतिया।।

नटखट श्याम ने रास रचाया
राधा मोहन जी को मन भाया ।
नैन सरीखा सब चुपके छुपके
जिगर फंस गया प्रेम में डुबके।

जादू से भरी ये, लगती बांँसुरिया
मन मेरा मोहे , तेरा ये सुरतिया।।

पनघट किनारे कदम पर झूले
संग सखिया बगिया सब फूले।
ग्वाल बाल सब जमुना के तीरे
आये मोहन पनघट पर धीरे।

राधिका कहे देखो, आया सांवरिया
मन मेरा मोहे , तेरा ये सुरतिया।।

राधा की प्रीत पवित्र मनभावन
राधा और मोहन पतित पावन।
प्रेम था कितना खुल्लमखुल्ला
जैसे बरसे रिमझिम सा सावन।।

राधा जी मोहन के हटे ना नजरिया
मन मेरा मोहे , तेरा ये सुरतिया।।

सारे जग के तुम हो रखवाले
मस्त मगन प्यारे कितने निराले।
सब जाने तेरी अनुपम लीला
मिटा अंधेरा करते उजाले।

हम सबको दिखा दो, ज्ञान की डगरिया
मन सबका मोहे, तेरा ये सुरतिया ।।

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