बेबसी:-विजय

किस बात से खफा हूँ
न है मुझको ये खबर
जिन्दा तो हूँ लेकिन
जिंदगी से हूँ बेखबर

सोता न हूँ रातों को
कटती कैसे दिन-दोपहर
सांसे बस चल रही है
है ये मुर्दो का शहर

चाहा जिसे भी मैंने
उसी ने ढाया है कहर
जिंदगी के साहिल से
टकरा रहे अरमानो के लहर

न जाने किसने किया
मुझपे है काला सहर (जादू-टोना)
घुल रही अब सांसो में
नफरत के सारे जहर


न है मुझको अब
किसी की भी फिकर
फिर भी बहे जा रहे
अश्कों के नहर

न बची कोई उमंग
कटेगा कैसे ये सफर
अब तो मौत के पड़ाव
पर जाऊ मैं ठहर

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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 06/03/2020
    • vijaykr811 06/03/2020
  2. DEVESH DIXIT 11/03/2020
    • vijaykr811 13/03/2020

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