अवरोध – शिशिर मधुकर

मुझे तुम मुझसे ज्यादा जानते हो जानती हूं मैं
तुम्हें अपना सनम तब ही तो दिल से मानती हूं मैं

तेरे कांधे पे सर रक्खा तुझे नजदीक से देखा
तेरी धड़कन की हर इक सदा पहचानती हूं मैं

तुझे अपना बनाया और सभी अवरोध ढा डाले
उसे पूरा करा हरदम जो मन में ठानती हूं मैं

यूं तो मैं चुप सी रहती हूं मगर जो सामने हो तू
मुहब्बत का मधुर सुर बस तेरे संग तानती हूं मैं

भेद हम में नहीं कोई बदन दो चाहें दिखते हों
ये सच जमाने से ना मधुकर बखानती हूं मैं

शिशिर मधुकर

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