रुक जाओ ना

सुनो नाआज यहीं रुक जाओ नाकुछ बातें दिल में थीऔर कुछ अधरों पे आ कर ठिठकी थीसब कहनी है मुझे आजअपने सारे राज खोलने है तुमसेकुछ भी छिपाने को मन हीं नही करता तुमसेबस इसलिएआज की रात मत जाओ नारुक जाओ नादेखो नाआज ये चाँद कुछ फीका हो गया है तुम्हारे सामनेतुम्हारी रौशनी को देख कर शरमा गया हैकमरे में बिखरी हुई है हर तरफमेरे जज्बातों के पुलिंदेकुछ कागजों में कैद है तो कुछ है दीवारों पे टंगेजरा इसे समेट जाओ नाऔऱ वो जो घर के पीछे का शहतूत का पेड़ हैउसकी छाल पे गुदा हुआ है एक नामजाओ ,जा के देख आओ नारुक जाओ नाकी आज कल तबीयत नासाज़ रहने लगी हैऔर अदरक वाली चाय भी तोबनानी नहीं आती मुझेमेरे सुर्ख होठों पे पपड़ियां जम गई हैजरा अपने लबों से इसे थोड़ा गीला कर दो नाजाना तो तय है सबका ही यहाँपर कुछ पल के लिए तुम ठहर जाओ नारुक जाओ ना

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 17/08/2019

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