ऐ दोस्त मेरे

मुझे नहीं पतातुम कब ,क्यों और कैसे आ गएअजनबी ही थे तुम मेरे लिएऔर मैं तुम्हारे लिएपर जब से तुम आये होमुझे मेरा हो कर रहने ही नहीं दियामुझे अपना बना लियामेरी साँसों में घुल करदखलंदाजियाँ करने लगेये जिस्म मेरा थाऔर ये दिल भीपर तुम इसमें खामखाह धड़कने लगेअजीब ही हो यार तुममेरे हर दर्द कोमुझसे पहले जान लेते होहर एक तूफान जोमेरे अस्तित्व को हिलाने आता हैउसे मुझसे पहले ही पहचान लेते होआखिर कैसे मेरे जज्बातों को समझ लेते होक्या कुछ जादू-वादू आता है तुम्हेंजो मेरे हर गम को छू मंतर कर देते होजब भी भटकाने लगता है जमानातुम उंगली पकड़ने आ ही जाते होऐ दोस्त मेरे ,अब तो मेरी जान ही हो तुम—अभिषेक राजहंस

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 17/08/2019

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