घनेरा – शिशिर मधुकर

लो आज ग़मों ने फिर आ के मुझे घेरा है
इस रात का अब कोई दिखता ना सवेरा है

हर तरफ उदासी है ना फूल खिला कोई
देखो तो कुदरत ने क्या चित्र उकेरा है

ना तना है ताकतवर और पात सभी झरते
ना पेड़ की शाखा पे चिड़ियों का बसेरा है

ना जाने कैसी किस्मत निकली है अपनी तो
जो शख्स मिला अब तक निकला वो लुटेरा है

क्या होगा ना जाने मंजिल मिल पाएगी
हर ओर देख मधुकर कोहरा ये घनेरा है

शिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. sarvajit singh sarvajit singh 08/08/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2019
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 08/08/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2019
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/08/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2019

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