झोलियां खाली रहीं – शिशिर मधुकर

झूठी मुहब्बत हम कभी देखो ना कर सके 
झोलियां खाली रहीं उनको ना भर सके

दर्द ए दिल हरदम रहा तो क्या करे कोई 
हम भी गमों में डूब के फिर ना उबर सके

धूल सी जमती रही अपने मकान पर 
बारिश की आस में कभी हम ना निखर सके

खुशियों की अब ना बात कर हमको मलाल है 
उस राह से जीवन में हम जोi ना गुजर सके

सोच को ऊंचा किया तो दुश्मनी बढ़ी 
मधुकर जमाने संग ना हम नीचे उतर सके

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6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 08/08/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/08/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/08/2019
  3. Khilesh 01/09/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/09/2019

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