मेरा चरित्र:-विजय

सब निर्भर तुम पर है
कैसा चरित्र हो मेरा
अगर तुम राक्षस हो
फिर रावण हूँ मैं तेरा

अगर प्रेम का भोग कराओ
फिर कृष्ण हूँ मैं तेरा
वीर अगर दानी हो तुम
फिर कर्ण अवतारी हूँ तेरा

अगर क्षत्रिय हो धरा पर
तो परशुराम नाम है मेरा
भाव यदि मित्र का है
तो नाम सुदामा है मेरा

अगर कपटी नर हो तुम
फिर मामा शकुनि हूँ तेरा
देव आलस के तुम हो
तो कुम्भकरण हूँ मैं तेरा


सेवा निर्मल तुझमे हो
तो सेवक हनुमंत हूँ तेरा
भातृ-स्नेह तुझमे हो
तो भरत अनुज हूँ तेरा

अगर रक्तबीज तुम हो
तो काली-दुर्गा हूँ तेरा
अगर विषधर तुम हो
तो शिव अवतारी हूँ तेरा

अगर शिष्य अनुशासित हो
फिर गुरु द्रोण हूँ तेरा
सच के तुम साधक हो
तो हरिश्चन्द्र हूँ तेरा

सब निर्भर तुम पर है
कैसा चरित्र हो मेरा

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3 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/08/2019
    • vijaykr811 vijaykr811 03/08/2019
  2. deveshdixit DEVESH DIXIT 04/01/2020

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