मुहब्बत के खुदा – शिशिर मधुकर

नजर के सामने यूं तो हजारों लोग आते हैं 
सभी दिल में मगर इंसान के पर ना समाते हैं

किसी की इक झलक ने दिल पे ऐसा वार कर डाला 
मिलन के वो हसीं लम्हें कभी भी ना भुलाते हैं

मुहब्बत की जहां पे आग हो थोड़ी घनी सुलगी 
वो ही आपस में मिलने पे सदा नजरें मिलाते हैं

तमन्ना सब से मिलने की कहां अब रह गई बाकी 
मुहब्बत के खुदा के ख्वाब पर हमको सताते हैं

किसी के बिन अधूरा है सफर ये जिंदगानी का

तभी आवाज दे मधुकर हम भी उनको बुलाते हैं

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