इश्कबाज..

क्या सच मेंकुछ बातें कहनी जरूरी होती है क्याकुछ चीज़ें ऐसे भी तो लोग समझ लेते हैकभी आँखों-आँखों सेतो कभी इशारा करके हीजज्बातों को जाहिर करने के लिएअगर जुबान का सहारा लेना पड़ेतो समझ लोतुम पूरे अभी पके नहींइश्क़ जो तुमने आखिर कर ही लिया हैकिसी उड़ते जुल्फों वाली लड़की सेउसके लिए तुम्हे अभी औरइसी आँच पे पकते रहना हैजब तक कि उसे तुम्हारे न होने का एहसासबेचैन ना करने लगेऔर उसके आँखों की नींद ना उड़ने लगेंउसके उड़ते दुपट्टे की तरहतब तक तुम्हे चुप्पी ही साधे रखना हैउसे पढ़ने दो तुम्हारे आँखों की भाषाऔर टटोलने दो उसे अपने मन कोजब तक की उसे तुम्हारे साथ खायीपानीपुरी मीठी ना लगने लगेऔर वो खुद को आईने के सामनेघण्टो बैठ करतुम्हारे लिए सँवारने ना लगेतुमने इश्क़ किया है ना उससेतो इतना इंतज़ार तो कर ही सकते होऔर एक बाततुम्हारा ये इंतज़ार उस दिन खत्म होगाजिस दिन उसके जिस्म को छूने सेपहले तुम उसकी आत्मा को छू लोगेजब उसके बिना पूछे हीतुम अपने सारे राज खोल दोगेऔर वो अपने दर्द को बहाने के लिएतुम्हारे कंधों का सहारा लेने लगेगीतभी मुक्कमल हो पायेगा तुम्हारा इश्क़और तुम कहलाये जाओगे–इश्कबाज

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3 Comments

  1. डी. के. निवातिया 27/07/2019
  2. Bhawana Kumari 28/07/2019
  3. C.M. Sharma 29/07/2019

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