रजा है – शिशिर मधुकर

छुप के मुहब्बत का अपना मजा है ना समझो ये पहरा कोई सजा हैउलफत कोई भी हलकी न होगी डंका ना खुल के जो कोई बजा हैवो मिलते नहीं हैं बरसों बरस तक ना समझो दीवानों ने सब कुछ तजा हैजो नजरें मिला के वो पलकें झुकाए समझ लो हर इक बात में फिर रजा हैजब भी वो नजदीक आते हैं मधुकर लगती बदलने ने ये सारी फजा हैशिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. C.M. Sharma 26/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 26/07/2019
  2. डी. के. निवातिया 27/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 28/07/2019
  3. Vijay Kumar Srivastava 21/09/2019
    • Shishir "Madhukar" 26/09/2019

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