मैं तुम्हारी कहानी का किरदार हूँ

मेरी कोई कहानी नहीमैं तुम्हारी कहानी का किरदार हूँ।तुम चलो जिस डगर वो ही मेरी डगरमुश्किलों के दौर में वफ़ादार हूँ।चोट तुमको लगी टूट मैं भी गयादर्द को दर्द का इल्म हो ही गया।मेरे ग़म का कोई आसरा ही नहीसंग ग़म में तेरे सिलसिलेवार हूँ।खुद से ज्यादा भरोसा जो तुमने कियाउस भरोसे की बुनियाद हिल सी गई।देखता ही रहा कुछ कर न सकासच कहूं मैं तुम्हारा गुनाहगार हूँ।छोड़ कर तुम अधूरी कहानी चलेआग हर पल मेरे हृदय में जले।पार होगा ये दरिया भला किस तरहनाव तुम हो मैं केवल पतवार हूँ।तुमने छोड़ा जहां मुझसे कुछ न कहाजो भी कहना था वो दिल मे ही रहाशब्दों में ढूढ़ता फिर रहा दर बदरपथ से भटका हुआ मैं कलमकार हूँ। देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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  1. C.M. Sharma 26/07/2019

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