अज्ञानता नहीं – शिशिर मधुकर

तुमसे जुदा कैसे रहूं दिल मानता नहीं सांसें कोई तेरे सिवा मैं जानता नहीं सीने से लग धड़कन तेरी जो कान से सुनी आवाज कोई और मैं पहचानता नहीं हर समय महफूज हो चिंता ना तुम करो तलवार हुस्न पे कभी मैं तानता नहीं मेरा दीवानापन मेरे सच का सबूत है ये प्यार में बहकी हुई अज्ञानता नहीं मैं दर्द ए दिल अपने ही फकत साथ रखूंगा जो दूर हैं मधुकर मैं उनको सानता नहीं शिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. C.M. Sharma 23/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 23/07/2019
  2. डी. के. निवातिया 23/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 23/07/2019
  3. Ashutosh singh 06/08/2019
    • Shishir "Madhukar" 07/08/2019

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