हथेलियों की छाप

*हथेलियों की छाप*वह बहुत खुश थी आजऔर मैं उससे भी अधिक खुश थाउसे खुश देख।वह मेरी हथेलियों के साथअपनी हथेलियों की छाप लेना चाहती थी आंगन की दीवार पर।सहेज कर रखना चाहती थीहमारे प्रेम की एक अनूठी निशानीहमारे जाने के बाद भी।उसकी मासूमियत में डूबामैं इनकार नही कर पाया।गहरे गुलाबी रंग में डूबीहमारी हथेलियों की छाप आंगन की दीवार पर ली गई।एकदम सटीक चमकदारबिल्कुल उसके व्यक्तित्व की तरहउसकी हथेली की छाप स्पष्ट नजर आ रही थी।और अपनी छाप को देखते हुएमेरी हथेलियां और मेरी जुबां लड़खड़ा रही थीनही जान पाया मैं उस लड़खड़ाहट की वजह उस वक़्त।आज जबकि वह नही है।मेरी पलके अश्रु में डूबीआंगन की दीवार पर अपनी हथेलियों की छाप परहथेलियों को रखती, उसकी हथेलियों की छाप कोनिहारती है।उसकी हथेलियों की छापआज भी उतनी ही स्पष्ट औरचमकदार है।मानो कहना चाहती होकि तुम्हारी हथेलियां केवल रंग में डूबी थीजबकि मैने रंग और प्रेमदोनों में डुबाया था।हकीकत यही थी कि तुममे खोकर मैंने खुद को पाया था। -देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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3 Comments

  1. C.M. Sharma 22/07/2019
  2. डी. के. निवातिया 22/07/2019
  3. Shishir "Madhukar" 22/07/2019

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