लाज – शिशिर मधुकर

तेरी मुहब्बत पे है नाज मुझको निशानी कोई तू दे आज मुझको तू साथी है मेरे पिछले जन्म का आती है ये ही आवाज मुझको जमाने मे यूं तो लाखों बशर हैं लुभाते हैं बस तेरे अंदाज मुझको नहीं कोई दूरी कहीं बीच में है तेरे पता हैं सभी राज मुझको तुझे छोड़ना तो मुमकिन नहीं है भले कोई देने लगे ताज मुझको तुझको सिमरना और तेरी बातें अब तो नहीं है कोई काज मुझको तू कितना है अपना कैसे बताऊं मधुकर ना तुझसे रही लाज मुझको शिशिर मधुकर

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9 Comments

  1. davendra87 21/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 22/07/2019
  2. C.M. Sharma 22/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 22/07/2019
      • C.M. Sharma 23/07/2019
  3. डी. के. निवातिया 22/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 22/07/2019
  4. vijaykr811 12/08/2019
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2019

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