अनमोलता – शिशिर मधुकर

तू जब भी मेरे से कुछ बोलता है
कानों में बस एक रस घोलता है

खुशबू के झोंके हवा संग चलेंगे
जैसे ही मुख अपना तू खोलता है

मुझको मुहब्बत है कुछ आज ऐसी
तेरे लिए ही ये मन डोलता है

तेरे पास में ही मैं सब कुछ लुटाऊं
कहे मेरा मनवा जो कुछ तोलता है

दिखी ना जो मधुकर को अब तक कहीं पे
तेरे पास हमदम वो अनमोलता है

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. C.M. Sharma 19/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 19/07/2019
  2. डी. के. निवातिया 22/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 22/07/2019

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