स्वर – शिशिर मधुकर

झोली को तेरी प्यार से मैंने तो भर दियावक्त ने तुमको मगर तनहा ही कर दिया अपनों की तुमको आस थी वो ही नहीं मिले कुदरत ने ही कांटों भरा तुमको ये घर दिया मजबूर हूं मैं भी यहां तुम तक ना आ सकीमुझको खुदा ने ना कोई मजबूत पर दिया आवाज मेरी दब गई ना बोल कुछ सकीरवायतों ने मुझको तो कमजोर स्वर दिया जैसा भी जिसको चाहिए मधुकर मिला किसे कुदरत ने अपनी मर्जी से सबको बशर दिया शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 19/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 19/07/2019

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