अनकहा प्यार

शीर्षक-अनकहा प्यारमैं जानता था फिर भी झुठला रहा थाएक बार नहीं बार-बारजितनी दफा तुम मिली ना मुझेशायद उतनी बारतुम्हे देख कर जो हाल होता था ना मेरा कहाँ बता पाया तुम्हें कभीशायद तुम्हे भी थामेरे कुछ कहने का इंतज़ारपर मैं भला मानस दिखने वाला लड़काडर लगता था आखिर कैसे करतामैं अपने जज्बातों का इजहारपता नहींकैसा लगता तुम्हेंये जानकर की मैं तुम्हें करने लगा था मन ही मन प्यारकाँच की तरह टूट ही जाता नाया फिर मोम की तरह पिघल जाताअगर कर देती तुम इंकारकहीं ग़लत ना समझ लो मुझेया फिर तुम नफ़रत ना करने लगो मुझेइसलिए कुछ भी नहीं कह पाता था तुम्हेंअपने जज्बातों को अपने भीतर ही रख करबिना कुछ कहे हीकरता रहा तुमसे अनकहा प्यार—-अभिषेक राजहंस

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

One Response

  1. C.M. Sharma 19/07/2019

Leave a Reply