नन्ही मुस्कान

मैं नन्ही मुस्कान तुम्हारीमुस्कानों की वजह न छीनो,सोन परी की कथा कहानीनानी माँ की जुबां न छीनों।दादी दादा चाची चाचा भइया भाभी काकी काका, सांझ ढले आँगन मे जमघटरिश्तों की मखमल गर्माहट। जीवन मे नवप्राण भरे जो, आँगन की वो हवा न छीनो।तुमने पगडंडी पर चलकरखेतों की हरियाली देखी,रिमझिम सावन की फुहार मेंमदमाती पनियारी देखी।सरसों के पीले फूलों सेधरती का श्रृंगार किया,नन्हे मुस्काते बिरवे सेघर आँगन गुलजार किया।फुलवारी में हरित कला कीबलखाती सी लता न छीनों।बरगद पत्थर पीपल पूजानीम आम से भरा बगीचा,शीतल पवन चले पुरवाईअमराई में रात बिताई।उन रातों में खलिहानों कीरखवाली की सजा न छीनों।भेदभाव का भाव था गहराजात पात का कड़ा था पहरा,फिर भी जब विपदा आतीदर्द में काया डूबी जाती ,गांव समूचा मदद को आताराहत की चादर दे जाता।नींद मधुमयी आती फिर तोहवा बसंती गाती फिर तो,उन गांवों के अपनेपन कीऐसी पावन फिजा न छीनों।कोयल कूके नित आंगन मेंगौरैया की फुदकन घर में,पंख फैलाये मोर नाचतेपपीहा गाये कुंज कानन में।रात्रि अमावस में चंदा सेसूना होता है जब अम्बर,धरती पर नन्हे दीपों कीजुगनू लहराते हैं चादर ।दृश्य सुनहरे तुमने देखेमुझसे उनका पता न छीनों।ताल तलैया पोखर सूखेबदरा जैसे नभ से रूठे,धूल भरा है शहर तुम्हारानभ से बरस रहा अंगारा।छाया वाले पेड़ कट गएपथिक राह में गिरे निपट गए।छद्म क्षुधा की रार रही हैहवा जलाकर मार रही है।प्रकृति कहती सुनो ध्यान सेवसुंधरा की धरा न छीनों।मैं नन्ही मुस्कान तुम्हारी मुस्कानों की वजह न छीनों।देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/07/2019
  2. C.M. Sharma 19/07/2019

Leave a Reply