प्रतीक्षा -2

तुम यूँ अचानक छोड़ गएसब रिश्ते नाते तोड़ गएअब गीत लिखूं किसकी खातिरकिसकी खातिर नग़मे गाऊँपर्वत सी पीड़ा आ पहुचीविपदा की क्रीड़ा आ पहुचीहुंकार भरूँ किस साहस सेकिस साहस से लड़ने जाऊं।गीतों में श्रृंगार तुम्ही सेजीत तुम्ही से हार तुम्ही सेपाषाण हृदय सा लगता हैथा खुशियों का संचार तुम्ही से।नीर अश्रु के बहते प्रतिपलकिसको अपनी व्यथा सुनाऊंयादों की सरिता में गिरकरलौह खंड सा डूबा जाऊं।लौट आओ तुम किसी हाल मेंविरह वेदना सही न जाती,मायूस हृदय,जर्जर काया मेंचेतनता धुंधलाती जाती।चौखट पर बैठे बैठेजीवन बीता जाता हैकिन्तु तुम्हारे आने का न कोई संदेशा आता है।चौखट और प्रतीक्षा कोअपनी अंतिम नियति बनाऊंजो न आये तुम प्रियतममैं न खुद चौखट बन जाऊं। देवेंद्र प्रताप वर्मा’विनीत’

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3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/07/2019
  2. C.M. Sharma 19/07/2019
  3. डी. के. निवातिया 22/07/2019

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