कलियुग – शिशिर मधुकर

किससे कहूं रिश्ता मेरा जो तुमसे खास है तेरे सिवा किसी और से कोई ना आस हैदेखो चमक जो अब मेरे चेहरे पे ना रही वापस मिले तरकीब उसकी तेरे पास हैजो भी है सच के साथ में तनहा सा रह गया कलियुग में सही आदमी लगता उदास हैकोशिशें करीं कि हर बड़े ताले को तोड़ दें पर ना जाने क्यों नहीं मिलता निकास हैवो दूर से लगता था कोई आदमी जहीन नजदीक से मधुकर मिला नकली लिबास हैशिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 18/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 18/07/2019

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