सितम – शिशिर मधुकर

मुझे कुबूल करो ना इतना शोर करो रात ढलने है लगी ना इसे भोर करो अपना जलवा तो दिखा तड़प रहा हूं मैं घुमा के रुख को जरा मेरी ओर करो डोर पतली सी सनम अभी बांधे है हमें यूं ना तड़पा के इसे घना कमजोर करो दूर बैठे ना रहो गले से आ के लगो खत्म ये बात करो खत्म दो छोर करो बिना तुम्हारे सनम देख जलता है बदन सितम मधुकर पे कहे नहीं तुम घोर करो शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 13/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 13/07/2019
      • C.M. Sharma 15/07/2019
        • Shishir "Madhukar" 15/07/2019

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