तुमको दूर न जाने दूँगी

छोड़ गए तुम हमको तन्हालेकिन इतना ध्यान रहेपीड़ा को मुस्काने दूंगीतुमको दूर न जाने दूंगी।बीच भंवर में तुमने छोड़ाहर बंधन हर नाता तोड़ामधुमय जीवन की आशा कोग्रहण लगा इस अभिलाषा कोयही भाग्य है यही नियति हैखुद को न समझाने दूंगीतुमको दूर न जाने दूंगी।मेरा मुझमें जो कुछ थावह तुझको अर्पण कर आईतुझमे खोकर तेरी होकरमुस्कानों की राह बनाई।उन राहों पर न जाने कीबंदिश नही लगाने दूंगीतुमको दूर न जाने दूंगी।तुम प्रेम के गहरे सागरमैं नदिया की चंचल धारामधुर प्रेम के रंग मंच परवरमाला ने हमें पुकाराहाय हमारी वरमाला केपुष्प नही मुरझाने दूंगीतुमको दूर न जाने दूंगी। ….देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 12/07/2019
  2. Shishir "Madhukar" 12/07/2019

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