नया दौर

साजिशों का दौर हो चला हैहर कोई अब साजिश ही करने लगा हैकहाँ किसी ने कुछ भी बचा रखा हैजिसे देखो वो तन के खड़ा हैहर कोई बस एक दूसरे को गिरा रहा हैअजीब दौर हो गया है जमाने काजिसे देखो ,वो चला जा रहा हैकोई रुक ही नहीं रहा हैअब रिश्ते बिक रहे है बाजारों मेंजज्बातों का कोई खरीददार ही नही मिल रहा हैआँसुओ का सैलाब आँखों मे ही जब्त हो गया हैअब बस नकली मुस्कानों का कारोबार हो चला हैसंवेदनाओं का गला घोंट दिया गया हैऔर इस दौर का ख़ुदा भी अब डरने लगा हैबेमतलब के इस दौर में उसके मंदिर की घण्टियाँकोई डरा हुआ ही तो बजा रहा है-अभिषेक राजहंस

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3 Comments

  1. डी. के. निवातिया 01/07/2019
  2. C.M. Sharma 03/07/2019
  3. Bhawana Kumari 03/07/2019

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