सार छंद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सार छंदमन चंदन मेरा करना तुम, साथ भक्ति ले आओवृंदावन के कृष्ण कन्हाई, मोहन प्यारे आओ।मन चंचल है इतना भगवन, नहीं किसी की समझीभटका बहुत जगह हूँ ऐसे, अब तो मुझे बचाओ।सूना हूँ तेरे चरणों में , रस अमृत की धारा हैतेरी सेवा मैं भी करूँगा , अपने चरण लगाओ।सूरदास – कबीरा – रसखान, भजे चैतन्य मीराभक्त के बस रहते भगवान, आओ हृदय लगाओ।यमुना तट पर नदी किनारे, एक बार फिर आओउस बंसी की तान सुनाके, हम सब को लुभाओ।प्रेम की बाती अब जला दो, उर में सबके ऐसेरगो-रगो में खुशियाँ ला दो,सुर्ख चमन महकाओ।सरल प्रेम मुझको भी देना, अपने चित में रख लूँभटका”बिन्दु”बहुत है भगवन,अब तो संकट टालो।

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 01/07/2019

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