अनमोल – शिशिर मधुकर

प्यार तुझसे जो मिला बड़ा अनमोल रहा सदा मिसरी में घुला तेरा हर बोल रहा जिसे चाहत की समझ आज तक आ ना सकीवो तो उलफत को फकत चांदी से तोल रहा क्या उन्हें प्यार करें जो सच ना बोल सकें ऐसे लोगों पे ढका झूठ का खोल रहा जिसे फितरत ही मिली बस जहर को बोने की वो तो हर हाल में बस विष ही फकत घोल रहा वो सयाना जो बना ना उसकी बात बनी दूर मधुकर से हुआ वो तनहा डोल रहा शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 01/07/2019
    • Shishir "Madhukar" 01/07/2019

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