अभिनन्दन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

करूँ अभिनन्दन, वंदन तेरा, यह मुझको स्वीकार नहींचरणों में गिर जाऊँ तेरा , यह मुझको इकरार नहीं ।तेरे जैसे ढ़ोंगी बाबा , बहुत से देखें हैं हमनेंजी हुजूरी मैं नहीं करूँगा, इतना मैं लाचार नहीं।अभी वक्त तेरा है तुम, जितना भी मनमानी कर लोतेरे गुंडे जो भी कर लें, तेरा मैं किरदार नहीं।मुर्खो को है मुर्ख बनाया , सीधे-सादे इंसानो कोअपना उल्लू सीधा करता, ये मुझको अंगीकार नहीं।भंडा तेरा मैं फोडूगाँ, बचके कहाँ तुम जाओगेफल तुझे करनी का दूगाँ, रोके कोई अवतार नहीं।चमकाये बाजार धर्म के, बहुतों को लूटा है तुमनेबम बारुद से डराते हो, क्या मेरे हाथ तलवार नहीं।गया जमाना जो था तेरा, खुला आँख है अब सबकाजाग गया है “बिन्दु” भी अब, रहेगा कोई दीवार नहीं।

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 25/06/2019

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