रचनाएँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

आप सबों के बीचआँख बंद विश्वास का जमाना नहीं है भाईधोखा देकर पैसा अब कमाना नहीं है भाई।खुद में अगर है भरोसा तो कुछ करके बताओझूठी शान – शौकत लेकर दिखाना नहीं है भाई।चापलूसी की चंगुल में फंसा रहे जो ऐसेनिपटेंगे इनसे इनको बचाना नहीं है भाई।खुद सुधरो और सुधारो यही हमारा नारा हैजोर जबरदस्ती की रश्म निभाना नहीं है भाई।आफ़त में भी साथ रहे हम ऐसे ना घबरायेंखुद की इज्ज़त मिट्टी में मिलाना नहीं है भाई।जिंदगी का है नहीं भरोसा किसका कहाँ ठिकानाखुद के अस्तित्व को ऐसे मिटाना नहीं है भाई।देख रहा “बिन्दु” दुनिया को हम इससे अलग नहीं हैंदेश भक्त से बड़ा कोई दिवाना नहीं है भाई। तेरी खुशियाँ चुरा कर हम क्या करेंगेदिल ऐसे में दुखा कर हम क्या करेंगे।मयस्सर होते कहाँ प्यार के तरानेदर्द तुम्हारा हम छुपा कर क्या करेंगे।तुम जहाँ रहो, चैन – ओ-सुकून से रहनाअपनी कहानी हम बता कर क्या करेंगे।हम कहीं जी लेंगें यादों के सहारेअपना जिगर जला कर हम क्या करेंगे।वो यादें, वो मुलाकातें बस याद हैतुम्हें बे मतलब रुला कर हम क्या करेंगे। मुझको अब अपना पाँव जमा लेने दोअपनों में ही अब मुझे समा लेने दो।बहुत खा लिए हम इधर – उधर की रोटीसत्य की धूनी मुझको रमा लेने दो।बहुत भटक लिए यहाँ – वहाँ, जहाँ-तहाँअपनी किस्मत हमें आजमा लेने दो।अपना – पराया सब खेल है कुदरत कीकुकर्मो का पहिया मुझे घुमा लेने दो।जिंदगी मेरी मुझको समझ में आ गयीथोड़ा तो पुण्य अब मुझे कमा लेने दो।

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