दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

रहा पड़ोसी देखता, मन में ले संतापईर्ष्या, खुद ही जल रहा, मन में लेकर ताप।बात अलग है गाँव की, अजब – गजब है मेलहोता कुछ भी जब यहाँ , जाते उनको भाप।दिल लेकर ही दौड़ते, देने दिल को प्यारढाढ़स उनको चाहिये, जितना भी दो आप।रिश्तों में भी अब नहीं, रही कहीं वो बातअपनी ही सब देखते, अपनी रखते नाप।

मानुष का यह काम है, करना कर्म प्रधानसत्य साथ हरदम रहे,तो रहती है छाप।

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 25/06/2019

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