मासूमियत वाला इश्क़

आखिर क्यों तुम्हे देख करसिर मेरा झुक जाता है क्या तुम ख़ुदा होजिसकी मैं इबादत करने लग जाता हूँतुम्हे देख कर मैं क्यो तू हो जाता हूँऐसा लगता है जैसे तेरे जिस्म में मैं रूह हो जाता हूँजानती है तू तुम्हे देख कर मैंपागल ही हो जाता हूँयार-दोस्तों से मरीजे-इश्क़ के ताने सुनता हूँसंजीदगी से रहने वाले इंसान के दिल मेंतुमने हलचल ही मचा रखी हैअपने झुमके, पायल ,काजल और सुर्ख गुलाबी लाली सेदुनिया वालों से बगावत करना सिखला रही हैअपने पहलू में बुला कर क्या तुम मुझसे कोई साजिश करने वाली होआखिर क्यों तुम मुझसेमेरी साँसे चुरा रही होक्यों तुम मुझे अपने मासूम से चेहरे से मासूमियत वाला इश्क़ करवा रही हो—अभिषेक राजहंस

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/06/2019
  2. Ishwar Patel 25/06/2019

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