अनिश्चित

मैं जब भी तेरी बातों को अपने जहन में लाता हूँ

सिसक उठता है दिल मेरा मगर खामोश रहता हूँ

तू जब जब ख्वाब में आकर मुझे अपना बनाती है

पलक खुलते ही आसमां से जमीं पर आके गिरता हूँ 

तेरी हर एक खामोशी को मैं फिर खवाब समझ बैठा

तेरी हर एक बोली को मैं फिर आभार समझ बैठा

गिराई थी महज कुछ  बूंद ही  तुमने ये पानी की

मैं हर एक बूंद को ही फिर एक बरसात समझ बैठा 

ख़यालों के भंवर में आज कुछ ही खवाब सच्चे हैं

कुछ अपने ही पराये हैं, कुछ पराये भी अच्छे हैं

भली भाँति परिचित था  मैं आज की ऊँचाई से

गिरने  पर  पता  चला कुछ  आधार  कच्चे हैं

 खुली आंखो से कुछ सपने संझोना रास ना आया

तुम्हें हर बात समझाना हमे कुछ खास ना आया

हम चाहते तो लगा देते ये कश्ती आज किनारे

पर तुम्हें भी आज रिश्ता ये निभाना खास ना आया

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

3 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 17/06/2019
    • Gyanender Singh Gyanender Singh 18/06/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/06/2019

Leave a Reply