खुदा भी कौन कौन से खेल खिला रहा है

खुदा भी कौन कौन से खेल खिला रहा है, एक शक्स को बारबार हंसा रहा है

ये हसी मामूली हसी नही है दोस्तों, एक शक्स घायल होकर मुस्कुरा रहा है

ना जाने कब वो सुबह होगी, साँसे थम सी जाएँगीधड़कने तेज होंगी

प्रणप्रण रहे तो अच्छा, अन्यथा एक झूठ हारेगा, एक सच की जीत होगी

काश की अब ये खेल यहीं खत्म हो जाए, जिंदगी बस अब यहीं थम सी जाए

हम तो गुजार लेंगे यूँ ही अपना सबकुछ, बस जिंदगी को जिंदगी मिल जाए

किसी घोर श्राप का ही परिणाम होगा ये, जो इस्स तरह कहर बरपा रहा है

अंत अंतिम चरण पर ही लगता है, अब दूसरा छोर नजर आ रहा है

खुदा भी कौन कौन से खेल खिला रहा है

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2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 17/06/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/06/2019

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