रचनाएँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मेरी आवाज़ दिल की धड़कन सब तुम्हारा हैये बुढ़ापा – जवानी ये बचपन सब तुम्हारा है।मेरा क्या था जो मेरे पास कुछ भी रहेगाये महल अटारी दौलत ये धन सब तुम्हारा है।तुम्हारा – हमारा, ये नजारा, अपना कुछ नहींये वन, उपवन ये सारा चमन, सब तुम्हारा है।ये धरती – आकाश, चांद – सूरज, ये ग्रह – तारेप्राण या आत्मा, जल अग्नि पवन, सब तुम्हारा है।माया – ममता का जाल है, झूठा – सच्चा खेलधर्म- कर्म,दुख – सुख,सकून – चैन ,सब तुम्हारा है।बिन मिले ही दूर से आपका सलाम हो गयाबंदा आपके पास आया नहीं गुलाम हो गया।बिन मिले ही दूर…मेहमान नमाजी कब तलक ख़िदमत हाजिर रहेबिनमोल बिकने वाला सरे आम नीलाम हो गयाबिन मिले ही दूर…दिल की बात मत पूछिये और न खबर लीजिएकमबख्त अपना दिल लगाया था हलाल हो गयाबिन मिले ही दूर…कि अब किसे अच्छा और किसे खराब कहियेगाऐसा क्या जो मुहब्बत में बंदा बदनाम हो गयाबिन मिले ही दूर…बहुत याद किया बहुत सपनें देखे थे प्यार के मैंनेसब धरे के धरे रह गये दिल कत्लेआम हो गयाबिन मिले ही दूर…न तो चैन था और न ही नींद थी ऑखों में मेरेदिल उखड़ा सा था और चेहरा मलाल हो गयाबिन मिले ही दूर….कि पूछिये मत दूसरे दिल की बात अपने दिल सेबिन्दु यही किया था कि जिंदगी फटेहाल हो गयाबिन मिले ही दूर…मुसाफिर हूँ मैं इस सफर काचलता जाता हूँहमें न कोई मंजिल दिखताबढ़ता जाता हूँ।ठहर जाता यहाँ – वहाँ – कहींफिर भी चलता हूँदिवानगी है ऐसी मेरीहँसता जाता हूँ।गर आ जाये बाधा कोईलड़ता जाता हूँकहीं आ जाये ऊँची चोटीचढ़ता जाता हूँ।घबराता नहीं तुफानों सेबहता जाता हूँजंगल रेत या पहाड़ों परकसता जाता हूँ।चिंता फल की छोड़ दिया हूँधर्म निभाता हूँसब कुछ जाने ऊपर वालाकर्म निभाता हूँ।भरोसा खुद पर है हमाराना पछताता हूँहौसला बुलंद रखता हूँ मैंइतर महकता हूँ।मंजिल हँस जाती है मेरीमैं इतराता हूँहार न मानो कभी तुम यारमैं बतलाता हूँ।शहद सा मीठा बोलने वाला आजतीखा कैसे बोल गयाकुछ भी समझ में नहीं किसी को आयाएक लतीफा बोल गया।आदमी समाज का था क्या वह करतासमाज से ही टूट गयाफैसला कर्तव्यनिकष्ठ नहीं था हक मेंइसलिए आज रूठ गया।पंचों से सबका, अब टूट रहा भरोसाहक इंसानी मार गयाखोटी नीयत देख, वह उससे दूर हुआआज जुवानी हार गया।मुँह देखकर उनकी हो जाती है बातेंदिल क्यों लाचार बन गयालोभ के मोहफांस में फंसे हैं ऐसेआपस में खार बन गया।दुनियाँ की हालात को ऐसे देखा हैथा दमखम तो जीत गयाअभी बूढ़ा हूँ बरगद सा सब देख रहाजिंदादिल हूँ, अतीत गया।दो बेटों के बीच में, बीबी की तकरारमाँ बेचारी देख कर, रह जाती लाचार।भाई – भाई में कलह, दुश्मन से भी तेजकभी मारते जान से, रखे कभी परहेज।भाई लक्ष्मण सा यहाँ, दिखता अब है कौनगुस्सा होकर भी रहा, राम चरण में गौन।रिश्तों में रखना नहीं, छुपा छुपाकर भेदवो रिश्ता रिसता रहे, जो हो उनमें छेद।भाई – भाई में अगर, रहता दिल में प्याररिश्तों के इस बीच में , जाती दुनिया हार । तरसेलऽ मनवां हमार, जियरा रह – रह के बोलेदेदऽ पिरितिया उधार, मनवां रह – रह के डोले।रह – रह के डोले जी रह – रह के डोले – 2देदऽ पिरितिया उधार, मनवां रह – रह के डोले।।दे देनी आपन तोहके, हम करेजा निकाल केकइसे हम बखान करीं, समझाईं कैसे हाल केजवानी के चढ़ल खुमार, जियरा रह – रह के बोले ।रह – रह के डोले जी रह – रह के डोले – 2देदऽ पिरितिया उधार, मनवां रह – रह के डोले।।कइ दिहलु पागल हमरऽ, काहे कइ दिहलु तू घायलसूरतिया जान मरलस कि , हम अब हो गइनीं कायलबन जा अबसे तू हमार, मनवां रह – रह के डोले ।रह – रह के डोले जी रह – रह के डोले – 2देदऽ पिरितिया उधार, मनवां रह – रह के डोले।।दे देनी आपन तोहके, हम करेजा निकाल केजीवन भर राखब गोरी , हम तोहरऽ संभाल केजवानी के चढ़ल खुमार, जियरा रह – रह के बोले ।रह – रह के डोले जी रह – रह के डोले – 2देदऽ पिरितिया उधार, मनवां रह – रह के डोले।।कानन को मत काटिये, वह तेरा हमराजकाटे जो इसको अगर, साथ गिरेगी गाज।पर्यावरण अब रो रही, बहती अश्रु की घारजल-वायु प्रदूषित हुआ, सूरज है अंगार।गंगा मैली हो गयी, गिरा हीम का ताजधरती के इस साज को, आप बचाओ आज।करते सब खिलवाड़ हैं, इस घरती के साथसब तमाशा देख रहे, रखे हाथ पर हाथ।हाल खनन की मत कहो, होंगे सब हैरानपैसे पर अब बिक रहे, देकर अपनी जान। वर्षा – ओला – वृष्टि, सब ही तेरा नाम हैजलधि से जल चुरा, बरसाना तेरा काम है।बहुत प्यारी महारानी, नभ की रानी होघुर – फिर तुम आ जाती, धरा तेरा धाम है।साथ देता जलद , सूरज हाथ बटाता हैबिजली की चकाचौंध कृषक का पैगाम है।आँधी – तुफान को लाती, जब गुस्से में अातीतहस – नहस कर जाती, इसलिए बदनाम है।उफान – तुफान मचाती, बाढ़ नदियाँ लातीअफरा – तफरी मचती, जैसे कि संग्राम है।भू की संतुलन हम, मिलकर सब बिगाड़ रहेहोती चर्चा खूब इसकी, अब सुवह-शाम है।हम सभी बदलेंगे यहाँ, कौन जानता हैजो इसकी पहल करता, वही बदनाम है।कश्मीरसन्नाटा है आज यहाँ पर, मातम काहे पसरा हैऐ वीर शहीद तुम जागो, यह कश्मीर का मसला है।तुम पर ही गर्व है मेरा, तुम ही देश के रक्षक होकर्णधार हो तुम सीमा के, तुम दुश्मन के भक्षक होरहो सचेत तुम जागकर, हर पल ही यहाँ हमला हैऐ वीर शहीद तुम जागो, यह कश्मीर का मसला है।।तुम दुश्मन से लोहा लेते, हम चैन से सोते हैहो जाते हैं शहीद सैनिक, उसके बच्चे रोते हैंमाँ – बाप भार्या का दिल भी, पीड़ा से ही मचला हैऐ वीर शहीद तुम जागो, यह कश्मीर का मसला है।।आतंकी बेखौफ घुमते , रह – रह के घात लगातेकौन जानता किस वेश में, वे बम – गोला बरसातेनहीं जानते कौन निशाना, उनका अपना अगला हैऐ वीर शहीद तुम जागो, यह कश्मीर का मसला है।।धारा तीन सौ सत्तर का, काग़ज़ में ही घुम रहाराजनीति की चक्कर में, बेमतलब का झुम रहाकश्मीरियों को क्या अब भी, तकदीर नहीं बदला हैऐ वीर शहीद तुम जागो, यह कश्मीर ।।गुणीअब न कोई राजा – रानीअब ना पंडित – ज्ञानीइनमें है कोई अगर तोउनकी अलग कहानी।नाम वाला जो कोई हैदागी उनके पीछेसरल बने दिखावे भर काक्या ना करता नीचे।मुख में राम बगल में छुरीरखे मृग सा कस्तुरीकलियुगी पैसा ही प्यारालालच यह अंगूरी।ठग विद्या सीखते पहलेफिर दुकान चमकातेमुर्खों की तो कमी नहीं हैफिर दाव आजमाते।जब भंडा इनका फूटताकरोड़पति बन जातेअज्ञ इनका साथ है देताइनका ही गुण गाते।अब आँखें खुली हैं कुछ कीबदल गये हैं पढ़केसत्य – असत्य समझ रहे हैंबातें करते चढ़के।चमक-धमक दिखावा भर हैइस पर मत जाना तुमकहे “बिन्दु” गुणी को खोजोदोस्त बन जाना तुम।

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2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 17/06/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/06/2019

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