झूठ से चेहरे – शिशिर मधुकर

मिलूं मैं कैसे तुझे हर जगह पहरे हैं घाव दुनिया के दिए आज भी गहरे हैं हर समय पास हैं जो सभी अपने तो नहींमनों में मैल लिए झूठ से चेहरे हैं तुम ही परेशान नहीं मिलन की आस लिए मेरे मन में भी सनम मचलती लहरे हैं सुहाने पल तो सदा चले ही जाते हैं ये जिंदगी में कभी कहीं ना ठहरे हैं भले ही आज सनम हाथ में हाथ नहीं देख परचम तो मगर प्रीत के फहरे हैं शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/06/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/06/2019

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