तगादा नहीं है – शिशिर मधुकर

दूरियां तुमने खुद ही बना लीं जो मुझसे तुम्हें याद अपना वादा नहीं है मुझे अब असल में ये लग रहा है मिलन का तेरा इरादा नहीं है खुशामद से मेरी ना तुम हो परेशां इक आईना मैं तो दिखला रहा हूं अगर तुम ना चाहो कोई गम नहीं है मुहब्बत में कोई तगादा नहीं है जितना समझता था मैं भोला भाला तस्वीर असली तो कुछ और निकली अब खोल उतरा तो ये मैंने जाना सनम मेरा इतना भी सादा नहीं हैं तुम्हें अपनी फितरत बताते हैं सुन लो भले दर्द सह सह के मर क्यों ना जाएं मगर बोझ जख्मों का अपने कभी भी गैरों के सर मैंने लादा नहीं है बड़ी पीर सह के उठे हैं यहां तक समझते हैं कैसे दर्द को दबाएं मधुकर संभलने लगा है खुद ही से तेरा मोल अब कोई ज्यादा नहीं है शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/06/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/06/2019

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