मुझे अकेला रहने दो

दखलअंदाजियाँ पसंद नहीं मुझे
मुझे अकेला रहने दो
कोई हाल न पूछे मेरा
चुपचाप सा मुझे रहने दो
मेरे गमों की बोलियां मत लगाए कोई
नहीं बिक सकते ये
इसे मेरे भीतर ही रहने दो
फिक्र खामखाह मत करे कोई मेरी
ना ही अपना बनाने की कोशिश करें
मुझे अजनबी ही रहने दो
ज्यादा करीब आने की कोशिश न करे कोई
मेरी खुद की लगाई आग है
मुझे अकेले ही जलने दो
तक़दीर को कोसने का हक क्यों छीन रहे हो मुझसे
मेरे हाथ की लकीरों को भला कैसे पढ़ सकता है कोई
ये रात का अंधेरा गहरा हो चला है
मुझे इस अंधेरे में पड़ा रहने दो
अपने ख्वाबों को बेच चुका हूं मैं
मुझे अब गहरी नींद में सोने दो
ज्यादा भीड़ मत लगाए कोई मेरी चिता पर
मुझे कम से कम चैन से तो मरने दो
—अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. Neeraj Rajbhar 06/06/2019
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/06/2019

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