तपिश – शिशिर मधुकर

अरे कुछ तो हलचल हुई होगी दिल में ख़बरें जो मेरी मिल ना सकी हैं देखा तो होगा आने का रस्ता ये नजरें तभी लग रही कुछ थकी हैं तनिक दूरियों की तपिश भी सहो तुम सफलता की खातिर हैं ये भी जरूरीतड़प मन में ज्यादा जो उठने लगेगी फसलें मुहब्बत की समझो पकी हैं मुझे छोड़ के तुम जब भी गए थे समय काटना भी मुश्किल हुआ था बड़ी शिद्दतों से समझा के मन को तेरे आने की राहें भी मैंने तकी हैं विछोह के दर्द को दीवाने ही जाने किसी और को ये समझ में ना आएं कोई पास जा के उनसे ही पूछे सकल पीर चेहरों पे कैसे ढकी हैं मुहब्बत को अपना धर्म जो बनाएं सबकी ना फितरत ऐसी मिलेगी अगर प्रीत की बस वो बातें करे हैं प्याली अमृत की सबने छकी हैं शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 06/06/2019
    • Shishir "Madhukar" 06/06/2019

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