रिश्तों की उम्र

ओस की बूंदों से,
जाड़े के कोहरे से,
धूप में परछाई से,
बादलों में इंद्रधनुष से,
कब हमसे जुड़ जाते हैं,
कब छूट जाते हैं..
कुछ रिश्ते अपनी उम्र लेकर आते हैं |

कुछ अजीब से होते हैं ये रिश्ते,
बेवजह ही उलझते हैं,
बेवजह ही सुलझते हैं |
पूरे होकर भी अधूरे से,
कुछ अधूरे से पर पूरे से |
कभी बहते हैं गालों पर आंसूं से,
कभी खिलते हैं होठों पर मुस्कान से,
कुछ रिश्ते अपनी उम्र लेकर आते हैं |

आते हैं दबे पाँव,
न कोई दस्तक, न कोई आहट..
हम मशरूफ ही रहते हैं
इनके साथ कल पिरोने में,
पता नहीं चलता रेत की तरह,
कब हाथों से फिसल जाते हैं ,
पलक झपकते ही बीता पल बन जाते हैं..

हाँ…कुछ रिश्ते अपनी उम्र लेकर आते हैं |

11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/05/2019
    • Garima Mishra 30/05/2019
  2. Abhishek Rajhans 30/05/2019
    • Garima Mishra 30/05/2019
  3. C.M. Sharma 06/06/2019
    • Garima Mishra 26/06/2019
  4. उमेश कुमार मिश्र 19/06/2019
    • Garima Mishra 26/06/2019
  5. Pradeep Trikha 06/08/2020
    • Garima Mishra 02/02/2021
  6. Pradeep Trikha 06/08/2020

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