रोता हुआ हमको छोड़ गई – डी के निवातिया

रोता हुआ हमको छोड़ गई!

तन-मन से हमको तोड़ गईरोता हुआ हमको छोड़ गई

किस बात की मिली सज़ाक्यों हम से तुम मुख मोड़ गई

बैठी रहती थी तू आँगन मेंघर में खुशियाँ सजती थी

तेरे मुख से जो भी निकलेदुआ सरीखी हमे लगती थी

गुस्से में कितना प्यार छुपाडांट-डपट अच्छी लगती थी

जब जब देखूँ खाली सूना वो कोनालगे खुशियों की गुल्लक फोड़ गई

बूढ़ा बीमार मेरा बाबुल प्यारा’माँ” किसके सहारे तू छोड़ गई

मेरा क्या होगा तुझ बिन,बिना विचारे मुख मोड़ गई,

किससे करुँ अब मन की बातेमुँह पे लगाके ताला छोड़ गई

एक बार सपने में ही बता जामुझे जिसके सहारे छोड़ गई

दो पल ही दिलासा दे जा ‘माँ’क्यों रोता हुआ हमे छोड़ गई।

तन-मन से हमको तोड़ गईरोता हुआ हमको छोड़ गई !!

***

— डी के निवातिया —

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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/05/2019
    • डी. के. निवातिया 02/07/2019
  2. Bhawana Kumari 30/05/2019
    • डी. के. निवातिया 02/07/2019
  3. C.M. Sharma 06/06/2019
    • डी. के. निवातिया 02/07/2019

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