तपती दुपहरी तन्हा पेड़ -Bhawana Kumari

तपती दुपहरी में एक तन्हा पेड़ हूँ ,ना जाने खेतो के बीच कब से खड़ा हूँ ।सूख कर अब बिलकुल कमजोर हो गया हूँ,पंछी ने भी अब खुद को मुझसे दूर कर लिया है ।पत्ते ने भी अब मेरा साथ छोड़ दिया है,।कभी बंधते थे सावन में झुले मुझ पर,राहगीर भी मेरे छाँव में बैठा करते थे ।बच्चे मेरे फल बड़े चाव से खाते थे,जब से सूख गया हूँ बिलकुल मैं ना ही मुझमें पत्ते और फल आते है ।ना ही पंछी बैठकर कलरव करते है,सावन में झुला भी अब नहीं डाले जाते,क्योंकि हो गया हूँ कमजोर तन्हा बूढ़ा मैं ।फिर भी खड़ा हूँ बारिश के इन्तज़ार में पूरी ंमजबूती के साथ खेतो में मैं ।भावना कुमारी

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया 28/05/2019
    • Bhawana Kumari 02/07/2019

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