बेहतर दवा – शिशिर मधुकर

कोई बेहतर दवा दे दो मर्ज ये ठीक हो जाए मुहब्बत गर मिले फिर से तनहा इंसान सो जाए कोई गेसू दिखाए इस तरह हर गम नदारत हो उनकी खुशबू में बस मदहोश हो इंसान खो जाए प्यार का साथ होता है तो कुछ भारी नहीं लगता मुहब्बत के लिए इंसान हर इक बोझ ढो जाए मेरे मन में ललक है पर नहीं अब फूल खिलता है कोई देखे यहाँ आ के प्रीत का बीज बो जाए मेरे इस मन के मंदिर में कोई कब से ना आया है नई बाती जलाने मधुकर दीप शृद्धा का धो जाए शिशिर मधुकर

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9 Comments

  1. Ram Gopal Sankhla 27/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 27/05/2019
  2. डी. के. निवातिया 28/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 29/05/2019
      • डी. के. निवातिया 30/05/2019
        • C.M. Sharma 06/06/2019
          • Shishir "Madhukar" 06/06/2019
  3. C.M. Sharma 06/06/2019
    • Shishir "Madhukar" 06/06/2019

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