बिखरे बिना – मधुकर

मेरी दीवानगी का तुम भी फायदा उठाते हो हर समय दूर रहते हो मगर हक़ भी जताते हो ना जाने कौन से डर ने तुम्हें आ आ के घेरा है भले बैठे रहो तनहा मुझे पर ना बुलाते हो सभी बलिदान तुमने इस मुहब्बत से ही ले डाले अपने कर्तव्य शिद्दत से बड़े तुम तो निभाते हो मैं इतना तो किसी के प्यार को देखो नहीं तरसा मुझे सोने ना देते हो आ के नींदे चुराते हो सिखा दो अब मुझे भी वो हुनर आ के यहाँ मधुकर जिससे बिखरे बिना तुम हसरतें मन की दबाते हो शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया 28/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 29/05/2019

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