कभी ग़म तो कभी खुशी

हार रहा हूँ मैंकवि लगातार विपल होने पर उदास होकर कहता हैहार रहा हूँ मैंटूट रहा हूँ मैंपिघल रहा हूँ मैंजाने कितने दिलों सेनिकल रहा हूँ मैं।हर बार है मिलीबस हार तो मुझेमैं चल रहा हूँ यूंबस यही सोच केजाने कब खुलेगातकदीर का तालाहर तरफ धुआं मकडियों का जालादेखकर यह सबसोच रहा हूँ मैंटूट रहा हूँ मैंपिघल रहा हूँ मैं।बढ़ चले कदमकवि की उदासी जब थोड़ी दूर होती हैं तो कहता है इक नई सुबहइंतजार कर रहीजाने कहाँ है मंजिलबेकरार कर रहीतूफानों में दिए को जब देखता हूँ मैंचिंगारी को जलाकरफिर सेकता हूँ मैंबढ़ चले कदमअब बढ़ चले है हमन मैं टू टूंगान मैंं रूकूंगान मैंं पिघलूंगान मैं झुकूंगामंजिल नहीं मिलेगी जब तकतब तक नहीं रूकूंगा।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. Rajat Yadav 27/05/2019
    • Ravi Srivastava 28/05/2019

Leave a Reply