डर – शिशिर मधुकर

तेरी मुहब्बत से लगता है डर अब इतना ना मुझको तू याद कर अब खुशियों के आंसू भी बहने लगेंगे मैं आती नहीं हूं तभी तेरे दर अबचलो छोड़ दो तुम भी रूहों की बातें सम्भाला हुआ है मैंने भी घर अबउड़ने की चाहत को मत ना बढ़ाओ समेंटे हैं मैंने भी देखो तो पर अबपाने और खोने का सोचो ना मधुकर जीवन का पूरा हुआ है सफर अबशिशिर मधुकर

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3 Comments

  1. C.M. Sharma 27/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 27/05/2019
      • C.M. Sharma 27/05/2019

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