बाहर का भोजन कितना हितकारी ?

नमस्कार पाठकों , जैसा कि आपने लेख के विषय को पढ़ा है उससे आप अंदाजा लगा सकते है कि बाहर का भोजन कितना हितकारी है और कितना नही ? रोजमर्रा के जीवन मे आज सबके पास 24 घण्टे प्रतिदिन होने के बावजूद भी हम अपनी महत्वकांक्षा के बढ़ती तादाद के कारण समय हमें कम मालूम पड़ता है लेकिन इसी समय के बीच हम अपने मूलभूत आवश्यकता को छोड़ शौक को प्राथमिकता देने लगते है ! उदाहरण स्वरूप आज ऑनलाइन फ़ूड की खाने की बात पर प्रश्न चिन्ह य उसपे सवाल न करके हम इस पर चर्चा करेंगे कि भोजन ग्रहण करने की दृष्टि से ग्राहक य भोजन ग्रहण करने वाला , उसे किस कसौटी पर सही,स्वादिष्ट और खाने के लिये बेहतर,सही मानता है !ये लेख को लिखने का मन इसीलिए हुआ क्योंकि जब अपनी आंखों से तकरीबन 15 सालों के सूक्ष्म शोध के बाद ये अहसास हुआ कि भोजन स्वादिष्ट हो यही जरुरी नही बल्कि भोजन परोसने वाला,माहौल,किस परिस्थितियों में भोजन को पकाया गया है ! ये तमाम बातें है जो भोजन ग्रहण करने वालो को प्रभावित व असर करती है !हाल ही में भूख से व्याकुल मेरे दिल ने बाहर का भोजन खाने के लिये मुझे बाध्य किया और विकल्प न होने के कारण मैं छोले कुलचे के ठेले के पास जाकर आर्डर देने ही वाला था कि उसके मुंह मे गुटखे और अन्य नशीला पदार्थ की तबाही देखकर दिल दहल गया !! उसके मुंह मे जो तालिबानी हमला हुआ था उसके छींट मुझ तक आ रही थी पर उसमें शक्ति कम होने के कारण वो छोले कुलचे में जाकर समाहित हो गयी ! 1 बार नजरअंदाज करके मन को मनाया पर तबाही मुंह मे अभी भी चालू थी और बाहर भी उसका असर मुझे बखूभी दिख रहा था तो अंततः मैंने उसे इसके लिये डांटा तो मुझपर ही बरसने लगा और कहा जाकर रास्ता नाप ! 20 साल से यहां पर हूँ , कभी किसीको दिक्कत नही हुई ! मेरे अंदर से आवाज आई भाई -साहब ! भैंस की आंख ! मतलब ये मुंह मे गुटखों का तालिबानी हमला 20 साल से चालू है , खैर जरूरी नही है 20 साल से ही हो , कम ज्यादा भी हो सकता था पर आश्चर्य इस बात का है कि मुंह को रेड कारपेट बनाना तो सही है लेकिन उसका असर जो बाहर वाले वातावरण पर पड़ता है उनका क्या होता होगा , हो सकता है वो व्यक्ति हो य कुछ भी , जैसे अभी इस का शिकार मेरे छोले कुलचे हुए ! खैर इस मुंह मे आई त्रासदी और आपदा देखकर मेरे पेट के चुंहो ने आत्महत्या कर ली और भूख फिर इस बात से सहम गयी कि बाकि छोले-कुलचे जो इतने सालों से खाया है क्या उसमें भी ये लाल आतंक का साया होगा य नही !! खैर आप इस तबाही से बच सकते है बनाने वाले के मुंह मे जाकर क्योंकि बाकि घटकों को तो नजरअंदाज कर सकते है पर ये छींटे आपको बहुत बीमार करने के लिये काफी है !!छोले कुलचे फिर भी पसंद है मुझे ! पोस्ट अपनी जगह भोजन अपनी जगह

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